
अपने मिरर डिफॉगर की वॉटेज को सही तरीके से चुनना
क्या आपने कभी गर्म शॉवर से बाहर निकलने के बाद देखा है कि आपके सामने सिर्फ सफ़ेद कोहरा ही है? यह बहुत परेशान करने वाला है। दरअसल, ठंडे काँच पर नम हवा लगने से ही ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है। इस समस्या को दूर करने हेतु हम शॉर्टवेव इन्फ्रारेड लैंपों का उपयोग करते हैं; ताकि काँच उचित तापमान पर गर्म हो जाए एवं कोहरा वहाँ न रुक सके। लेकिन ध्यान रखें – आप जितनी अधिक वॉटेज वाला लैंप इस्तेमाल करेंगे, उतनी ही समस्याएँ भी होंगी। यहाँ संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सही वॉटेज चुनना आपको मिरर के आकार के हिसाब से ही वॉटेज चुनना होगा। यदि आपके पास 600 मिमी × 800 मिमी से छोटा मिरर है, तो 50W से 100W की वॉटेज ही पर्याप्त होगी। यदि आप अधिक वॉटेज वाला लैंप इस्तेमाल करेंगे, तो मिरर क्षतिग्रस्त हो सकता है। बड़े शॉवर रूमों हेतु 200W या 300W की वॉटेज आवश्यक होगी। लेकिन एक ही बड़ा लैंप इस्तेमाल न करें; बल्कि कई छोटे लैंपों का उपयोग करें। ऐसा करने से मिरर की सतह पर ऊष्मा समान रूप से वितरित होगी, और कोई भी हिस्सा धुंधला नहीं रहेगा। तकनीकी पहलू हम इन लैंपों हेतु क्वार्ट्ज एनवेलपमेंटों का उपयोग करते हैं; क्योंकि ये ऊष्मा को तुरंत ही काँच तक पहुँचाते हैं। लेकिन ध्यान रखें – अधिक वॉटेज के कारण मिरर के जुड़ने वाले हिस्सों पर अत्यधिक ऊष्मा पड़ सकती है। यदि आप 300W वाला लैंप 100W वाले हाउसिंग में लगाएंगे, तो आपके कनेक्शन खराब हो सकते हैं। वास्तविक उपयोग जब आप इन लैंपों को लगाएं, तो ध्यान रखें कि लैंप मिरर की सतह से ठीक तरह जुड़ा हो। कोई भी हवा का अंतराल इन्सुलेटर का काम करेगा, जिससे ऊष्मा समान रूप से नहीं वितरित हो पाएगी। यदि लैंप ठीक से जुड़ा न हो, तो आप बेकार ही ऊर्जा खर्च करेंगे, और मिरर के कुछ हिस्से ही साफ़ रहेंगे। मेरी सलाह पहली बार इन लैंपों का उपयोग करते समय आईआर थर्मामीटर का उपयोग करें। इससे आपको पता चल जाएगा कि ऊष्मा कहाँ-कहाँ जा रही है, ताकि आप जान सकें कि ऊष्मा समान रूप से वितरित हो रही है या नहीं।